सकारात्मक सोच के तरीक़े

सकारात्मक सोच के तरीक़े

‘ तू चार दिन की चांदनी में मुस्कुराना सीख लेे ,

तू तार सप्तक की ध्वनि में गुनगुनाना सीख ले,

ये रात है कट जाएगी,एक दिन सुबह तो आएगी,

तू उस सुबह की आस लेकर जगमगाना सीख ले ‘

हमारा जीवन उतार चढ़ाव से मिलकर बना हुआ,हर इंसान इस तरह से ही जीवन जीता है और जीवन जीने का मज़ा भी तभी है जब उतार चढ़ाव आए, क्योंकि एक ही तरह का जीवन नीरस लगने लगता है और इसी बीच हमारा मन कई दिशाओं में सोचने लगता है ,कभी कभी वो कुछ अच्छा सोचता है या स्वयं के हित में सोचता है और कभी कुछ बुरा भी सोचता है और इंसान की यही सोच या किसी भी मोड़ पर उसका रवैया ही तय करता है कि उसकी नकारात्मकता हावी है अथवा वो सकारात्मक है।

ज़िन्दगी के किसी भी मोड़ पर ये बेहद ज़रूरी है कि हम सकारात्मक विचारों को अपना कर नकारात्मकता से दूर रहें,क्योंकि यही सकारात्मकता हमें बेहतर सोच रखने की प्रेरणा देती है और जीवन की हर मुसीबत से डटकर सामना करने का संबल प्रदान करती है।

लेकिन जीवन में हर वो बेहतर काम इतनी आसानी से नहीं किया जा सकता,या हम ये भी कह सकते हैं कि आसान होना थोड़ा मुश्किल है,इसलिए अपने जीवन को आसान बनाने के को तरीक़े हैं वही हैं सकारात्मकता को अपने जीवन में ढालने के तरीक़े,सकारात्मक सोच ना केवल हमारे अंदर ऊर्जा का संचार करती है बल्कि एक अच्छा इंसान भी बनाती है, आइए अब देखते हैं कि किस तरह से हम अपने विचारों में सकारात्मकता ला सकते हैं।

१.मेडिटेशन करने के बहुत से फायदे हैं और सकारात्मक विचारों का भी समावेश मेडिटेशन से संभव है।

२.शिकायत करने से बचें।

३.ईर्ष्या अथवा द्वेष की भावना ना रखें।

४.अपनी बातों को हमेशा सुस्सजित करके रखें।

५.ख़ाली ना बैठें,कुछ ना कुछ करते रहें।

६.अपने विचारों को हमेशा कहीं पर लिखते चलें।

७.रात को सोने से पहले ५-६ मिनट अपनी उस दिन की दिनचर्या के बारे में विचार करें और उस दिन आपने क्या अच्छा और क्या बुरा किया इन सबको भी सोचें।

८.अपने प्रति हीन भावना कभी ना आने दें,क्योंकि इस से आत्मविश्वास में भी कमी आती है और नकारात्मक विचार भी घेर लेते हैं।

ये कुछ तरीक़े हैं जिस से आप स्वयं को सकारात्मक विचारों से भर सकते हैं और नकारात्मकता से दूरियां बना सकते हैं।

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