योग और उसके फायदे

योग और उसके फायदे

यस्मादृते न सिध्यति यज्ञो विपश्चितश्चन।

स धीनां योगमिन्वति।।

योग के बिना किसी विद्वान का कोई यज्ञकर्म  सफल नहीं हुआ है,योग व्यक्ति के कर्म में भी व्याप्त है।

योग शब्द संस्कृत भाषा के युज शब्द से बना है जिसका मतलब है जुड़ना अथवा ब्रह्म में लीन होना।

एकाग्र चित्त होकर की गई साधना जो हमारी आत्मा को परमात्मा से जोड़ती हो उसे हम योग कहते हैं,योग का इतिहास 5000 वर्ष पुराना है, वेदों और पुराणों में सीधे तौर पर योग के प्रमाण मिलते हैं, योग का उपदेश सबसे पहले हिरण्यगर्भ ब्रह्मा ने दिया था,इसके उपरांत योग को दो भागों में बांट दिया गया:

१. ब्रह्म योग :चिंतन की सहायता से सूक्ष्म शरीर(आत्मा) पर नियंत्रण प्राप्त करना ही ब्रह्म योग है, इसकी सहायता से इंसान अपनी इन्द्रियों को वश में कर सकता है।

२. कर्म योग : स्थूल शरीर या भौतिक शरीर के हर अंग को सुचारू रूप से कार्य करने के लिए की जाने वाली गतिविधियों को कर्म योग कहते हैं, कर्म योग की परंपरा विवस्वान की है।

प्राचीन काल से अबतक गुरु शिष्य परंपरा की मदद से योग आगे बढ़ रहा है और तमाम तरह के व्याधियों से मुक्ति दिला रहा है,पूरे विश्व में योग की प्रसिद्धि भारतवर्ष के योग ऋषियों ने की है।

योग के फलस्वरूप तमाम तरह की व्याधियां दूर होती हैं,यही नहीं योग हमारे चंचल मन को भी काबू में करना सिखाता है और जीवन में खुशियों का वास करने में मदद करता है, महर्षि पतंजलि ने योग को ८ अंगों में बांटा जिसमें हर अंग का उपयोग हमारे स्वास्थ्य कल्याण, मानसिक कल्याण के लिए है ,इस अंग को हम अष्टांग कहते हैं:

१.यम

२. नियम

३. आसन

४. प्राणायाम

५. प्रत्याहार

६. धारणा

७. ध्यान ए

८. समाधि

इन सबका पालन करके हम योग के चरम लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं।

योग के फायदे कुछ इस प्रकार है,जिसे तमाम चिकित्सक भी सुझाव देते है और समझाते हैं:

मानसिक:  ब्रह्म योग का योगदान मानसिक संतुलन बनाए रखने के लिए है,इसके लिए ध्यान सबसे अच्छा साधन है,ध्यान की मदद से इंसान मानसिक रूप से स्वयं को स्वतंत्र महसूस करता है,यही नहीं जो इंसान तनावग्रस्त अथवा अवसादग्रस्त हो उसके लिए ब्रह्म योग एक रामबाण सिद्ध होता है।

शारीरिक:शारीरिक व्याधियों को दूर करने में भी योग बहुत सहायक होता है,योग के सतत् अभ्यास से हर तरह के रोग ठीक हो सकते हैं,हालांकि ये समय और संयम मांगता है,इसलिए हमें धीरज रखकर योग क्रिया करनी चाहिए और शीघ्र फल की कामना नहीं करनी चाहिए,अष्टांग योग में आसन और प्राणायाम को शारीरिक तौर पर इंसान को मजबूत बनाने के लिए बताया गया है।

आज के इस दौर में ये बहुत ज़रूरी है कि इंसान मानसिक और शारीरिक तौर पर बिल्कुल ठीक हो,इसलिए योग को अपने जीवन में ज़रूर लाएं।

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