मेडिटेशन

मेडिटेशन

अपनी चेतना को बाह्य क्रियाओं से हटाकर किसी एक विशेष स्थान पर इकट्ठा करना ही ध्यान लगाना है,मेडिटेशन का उल्लेख कई उपनिषद् में भी पाया जाता है,महर्षि पतंजलि के योगसूत्र में भी ध्यान का उल्लेख पाया जाता है।

ध्यान दरअसल समय की पाबंदियों से परे ,स्वयं को उस अवस्था में लेे जाना है जहां पर केवल वही चीज़ या वस्तु दिखे जिसपर ध्यान केंद्रित किया गया हो,मूलतः ध्यान चेतनावस्था को सुदृढ़ करने की एक बेहद सूक्ष्म कला है जो सरल तो नहीं किन्तु इसको सीखने और जीवन में उतारने के बहुत महत्व हैं।

पहले हम बात करते हैं कि मेडिटेशन को कैसे किया जाए:

१. अपनी आंखों को बंद करके एक स्वर्णिम आभा को आंखों के सामने महसूस किया जाए,हालांकि शुरू में ये कुछ ही सेकंड तक ऐसा हो पाता है किन्तु अभ्यास के साथ ये बेहतर तरीक़े से हो पाता है।

२.किसी सफ़ेद काग़ज़ पर एक काले रंग का गोल बिंदु बनाएं और उस पर लगातार अपने ध्यान को केंद्रित करें,और इस तरह से केंद्रित करें कि बाह्य क्रियाओं को भूल कर केवल वही दिखे।

तो इस तरह से हम मेडिटेशन को अपने जीवन में उतार सकते हैं।

मेडिटेशन के बहुत फायदे हैं,हालांकि कई लोग मेडिटेशन को ईश्वर में लीन होने के लिए भी करते हैं,ईश्वर में लीन होने का भी तात्पर्य है अपने अंदर की शक्तियों को जागृत करके ईश्वरीय रूपी आत्मा को स्मरण करना या देखना।

मेडिटेशन के फायदे:

१.सृजनशीलता एवं सकारात्मकता

२.चेतनावस्था को जागृत करना अथवा आत्मज्ञान की प्राप्ति

३.इन्द्रियों पर नियंत्रण

४.रोग प्रतिरोधक क्षमता में इज़ाफा

५.तनाव में कमी

तो इस तरह से आप अपने जीवन को सुखमय बनाकर,अपने अंदर के विकारों को मेडिटेशन की सहायता से दूर कर सकते हैं और जीवन को खुशनुमा रख सकते हैं।

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