भारतीय संस्कृति

भारतीय संस्कृति

दुनिया की प्राचीनतम संस्कृति में से एक है भारत की संस्कृति,जिसमें भारत का इतिहास,भूगोल और कई प्रकार की सभ्यता सुनहरे अक्षरों में गढ़ी हुई है,यही नहीं भारत की संस्कृति ने ही कई धर्म को भी जन्म दिया है,वैदिक जीवन के विकास से लेकर बौद्ध धर्म की शुरुआत तक सभी की साक्षी है भारतीय संस्कृति,हालांकि इस संस्कृति ने स्वयं के अंदर पड़ोसी देशों के भी कई रिवाजों को समेट रखा है,भारत कई धर्म जैसे हिन्दू, जैन, बौद्ध, सीख आदि का जनक है।

भारतीय संस्कृति के जीवन काल की बात करें तो ऐसा कहा जाता है कि चीनी संस्कृति के बाद यही एकमात्र ऐसी संस्कृति है जिसे  अमरत्व प्राप्त है,क्योंकि भारतीय संस्कृति के ही समकालीन रही मेसोपोटामिया की सुमेरियन,असीरियन इत्यादि संस्कृति काल के गाल में समा चुकी हैं और इनके अस्तित्व को बहुत कम ही जीवित रख पा रहे हैं,जबकि भारतीय संस्कृति पर लाख प्रहार होने के बाद भी ये संस्कृति ने कभी हार मान ना नहीं सीखा और हर बार जीत कर पुनर्जीवित हुई,भारतीय संस्कृति की सबसे अच्छी बात ये है कि ये संस्कृति कर्म प्रधान संस्कृति है।

भारतीय संस्कृति को जगद्गुरु का भी दर्जा दिया गया है,क्योंकि इस संस्कृति ने केवल भारत वर्ष को ही सभ्य नहीं बनाया बल्कि अन्य कई जंगली जातियों को भी सभ्य बनाया है और अपने आप में पूर्ण हुई,अगर हम आधुनिक युग की भी बात करें तो भी हम ये पाएंगे कि बहुत से विकसित देश स्पष्ट तौर पर भारतीय सभ्यता को अपनाते हुए नज़र आते हैं,आज इस महामारी के दौर में भी हम साक्षात् उदाहरण देखें तो हम ये पाएंगे कि विदेशों में भी लोगों के ग्रीट करने का तरीका बदला है और लोग भी आज भारत की परंपरा के अनुसार नमस्कार करना बेहतर समझ रहे।

अगर भाषा के लिहाज़ से बात करें तो पूरे भारत में आज  ४१५ से अधिक भाषाएं उपयोग में है,हालांकि इसमें कई क्षेत्रीय भाषा शामिल नहीं है,क्योंकि ऐसा माना जाता है कि हर ५० कि मी में भाषा का लहज़ा बदलता है।

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