बच्चों में नैतिक शिक्षा की कमी

बच्चों में नैतिक शिक्षा की कमी

भारत अपने संस्कार और संस्कृति के लिए पूरे विश्व भर में विख्यात है,पूरी दुनिया भारतीय संस्कृति का लोहा मानती है,और यही संस्कार बच्चों में कम उम्र में ही उनके माता पिता डाल देते हैं और इसी का असर जीवन भर उनके ज़ेहन में  रहता है,क्योंकि इसके अभाव में बच्चे बिगड़ जाते हैं या कामयाब नही हो पाते,पथभ्रष्ट हो जाते हैं और समाज से भी बेदखल कर दिए जाते हैं,हालांकि अब का समाज धीरे धीरे बचपन में दी जाने वाली शिक्षा को भी भूलता जा रहा है और यही वजह भी है कि नैतिक शिक्षा का पतन हो रहा है,जिसकी वजह से  खुशियां भी छिन जा रही हैं।

नैतिक शिक्षा के पतन से पूरे देश के युवाओं पर क्या प्रभाव पड़ सकता है ये हम सोच भी नहीं सकते,आज हम देख रहे हैं कि छोटे छोटे बच्चे सिगरेट की कश लगाते हुए या भांग, चरस का सेवन करते नज़र आ रहे है,अभी हाल ही में एक अख़बार में पढ़ने को मिला कि एक १४ वर्ष के लड़के ने ८ वर्ष की लड़की के साथ दुष्कर्म का प्रयास किया।

ऐसी बातें सुनने के बाद कहीं ना कहीं नैतिक शिक्षा पर सवाल ज़रूर उठने लगता है कि आखिर क्या शिक्षा दी गई है जो एक इतना छोटा बच्चा संलिप्त हो जा रहा है,इससे एक बात तो स्पष्ट है कि हम किसी ग़लत राह पर चल रहे हैैं और यहां चलते हुए हम सफल तो नहीं हो सकते हैं और वास्तविकता भी ऐसी ही है,जब ऐसी शिक्षा मिले की बचपन ही बुरे कर्म से गुज़रे तो हम आगे के जीवन के विषय में क्या ही टिप्पणी कर सकते हैं।

बहरहाल अब भी समय है अपने बच्चों में संस्कार डालने का काम करें और  माता पिता इसपर ध्यान दें,आप सचेत हो जाइए अन्यथा ये भी संभव है कि आप अपने बेटे को ही वैसे कर्म करते हुए देखें जिसकी आपने कभी कल्पना भी नहीं की होगी,जिसका सीधा प्रभाव आप आने वाले समय में देखेंगे।

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