नकारात्मकता में सकारात्मकता (Benefits of Lockown)

नकारात्मकता में सकारात्मकता (Benefits of Lockown)

कोरोना महामारी का प्रकोप जिस प्रकार से पूरे विश्व में फैल चुका है वह वास्तव में भयावह है ,पूरा विश्व और जन जीवन त्राहिमाम कर रहा है, लोगों के दिमाग में डर का समावेश हो चुका है यही वजह भी है कि लोग तनावग्रस्त भी हो रहे हैं,क्योंकि इस महामारी की वजह से जो लॉक डाउन लगाया गया है वो इन्हें स्वतंत्रता  नहीं दे रही, ये ज़रूरी भी है कि ऐसे समय में हम घरों में रहें, लॉक डाउन का पालन करें और इस विचित्र सी बीमारी का डटकर सामना करें।

हालांकि ये लॉक डाउन हमें पाबंदियों में तो रख रहा है लेकिन यह हमें पारिवारिक स्वतंत्रता भी दे रहा है,भावनाओं का नया स्रोत हमारे अंतर्मन से जन्म ले रहा है, इस वास्तविक दुनिया को हम थोड़े आदर्शवाद के पहलू से जोड़ने में सक्षम हो रहे हैं संक्षिप्त में ये कहा जा सकता है कि पूरी दुनिया का नए सिरे से जन्म हो रहा है।

कुछ खुशनुमा पहलू जो इस लॉक डाउन से सीधे निकल कर आ रहे हैं वो कुछ इस प्रकार हैं-

१. पारिवारिक चेतना से हम फिर से जुड़ रहे हैं।

इस वर्चुअल दुनिया से हम ऊब गए थे, यही वजह है कि  हम परिवार से बाह्य तौर पर तो जुड़े हुए थे लेकिन आंतरिक तौर पर हम उनसे जुड़े नहीं थे ऐसे में ये समय उस अंतर को पाटने की भरपूर कोशिश कर रहा है,आज तकरीबन हर इंसान अपने अपने घरों में कैद होकर भी स्पष्ट तौर पर आज़ाद महसूस कर रहा है और सबसे अच्छी बात ये कि हम सब आज अपने माता – पिता के लिए भी समय निकाल पा रहे हैं और इस भागदौड़ से भरी ज़िन्दगी में सुकून  और सकारातमकता के  कुछ पल भी व्यतीत कर रहे हैं।

२.इस लॉक डाउन के समय में हम खुद को समय दे पा रहे हैं और अपनी आलोचना या खुद में कोई नया बदलाव लाने की कोशिश कर रहे हैं जो हमें आत्मनिर्भर बनाने में मदद भी करेगा।

३.हम अपनी रुचियों पर भी विशेष ध्यान दे रहे हैं और नई नई योजनाओं से खुद को भर रहे हैं जो कहीं ना कहीं इस नकारात्मक दौर में सकारात्मकता का संदेश है।

४. इस लॉक डाउन के दौर में प्रकृति भी परतंत्रता की बेड़ियों से मुक्त हो रही है,प्रदूषण से खस्ताहाल प्रकृति की दशा अब काफी हद तक सुधर चुकी है जिसका नए सिरे से पुनर्जन्म हो रहा है।

५.केवल इतना ही नहीं हम प्रकृति को नए तरीके से जानने का भी प्रयास कर रहे हैं, ऐसे समय में हम प्रकृति की उन सूक्ष्म बिंदुओं पर ध्यान दे रहे हैं जो आम तौर पर एक दार्शनिक ध्यान देता है,ये प्रकृति के लिए भी शुभ संकेत है और हमारे लिए और हमारी अगली पीढ़ी के लिए भी।

तो ये पूरी दुनिया जिस तरह से इस महामारी से लड़ते हुए भी एक नए अध्याय को लिख रही है वो वास्तव में काबिल – ए- तारीफ है।

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