जीवन का लक्ष्य : खुशियां

जीवन का लक्ष्य : खुशियां

इस भाग दौड़ भरी ज़िन्दगी में इंसान जिस तरह धन दौलत के लिए भागता फिर रहा है उस से कहीं ना कहीं उसका ही स्वयं के समय नहीं निकल पाता जिसकी वजह से वो जीवन के परम आनंद से वंचित रह जाता है और आखिरकार अवसादग्रस्त हो जाता है,जिस से अपने आप ही तमाम रोगों को निमंत्रण मिल जाता है,हालांकि ये बिल्कुल सोचने वाली बात है कि आखिर वो धन दौलत ही किस काम की जो हमें जीवन के परम आनंद का लुत्फ़ लेने से वंचित कर दे।

यही नहीं कई लोगों को अपने जीवन का मुख्य लक्ष्य भी पता नहीं होता,जीवन का लक्ष्य हर इंसान के लिए एक समान ही होता है बस उसके तरीक़े अलग अलग होते हैं उस लक्ष्य को पाने के ,और यही तरीक़े उसके जीवन को सुखमय भी बनाते हैं या उसे जीवन की विविधताओं से वंचित भी कर देते हैं।

मनुष्य योनि में जीवन प्राप्त करना भी बड़े सौभाग्य की बात है,पिछले जन्म के अच्छे कर्म ही मनुष्य योनि में जन्म के कारक होते हैं,तो ऐसे में ये ज़रूरी है कि हम इस बहुमूल्य जीवन को जिएं ना कि जीवन को बोझ बना दें।

अगर हम सभी व्यक्तियों के चरम लक्ष्य की बात करें तो हर इंसान अपने जीवन में खुशियां चाहता है ,हर इंसान अपने जीवन को आनंदपूर्वक जीना चाहता है ,धनोपार्जन का उद्देश्य भी यही है,लेकिन बात फिर ये उठती है कि जब खुशियों के लिए ही इंसान परिश्रम करता है तो वो खुशियां कहां चली जाती हैं उसे नसीब क्यों नहीं होती,इसका उत्तर है जीवन में सामंजस्य ,क्योंकि हम अपने काम और अपनी निजी ज़िंदगी में समय का सामंजस्य ठीक ढंग से नहीं कर पाते और यही वजह भी है कि हम जिस लक्ष्य के लिए तरीक़े चुनते हैं वो तरीक़ा तो कामयाब होता है लेकिन वो लक्ष्य को समय ही नहीं मिल पाता।

इसलिए हमें अपने जीवन को कुछ इस तरह से ढालने की ज़रूरत है जिस से हमारे जीवन का चरम लक्ष्य हमें ज़रूर प्राप्त हो।

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