जान है तो जहान है

जान है तो जहान है

आजकल की दुनिया जहां सबकुछ वर्चुअल हो चुका है, दोस्ती , रिश्ते सबकुछ आभासी से प्रतीत हो रहे हैं इसमें स्पष्ट है कि रिश्ते की गुणवत्ता में कमी आ रही है,नज़दीकियां तो है लेकिन नज़दीक नहीं हैं,ऐसे में तमाम तरह की विसंगतियां घेर रही है इंसान को,और नियम विरूद्ध कदम उठाने लग रहा है जिससे स्वयं ज़िन्दगी ही शर्मसार नहीं हो रही अपितु वो पूरा समाज भी कलंकित हो रहा है।

तो ऐसे ही एक मुद्दे पर आज कुछ लिखने की इच्छा जगी ,अभी हाल ही में एक बड़े अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के सुसाइड के बारे में हम सबने सुना,सबको ही दुख हुआ सबने स्टेटस भी लगा दिया,लेकिन इसके बारे में या ऐसी घटना दोबारा ना हो ,इसके लिए कोई इंतेज़ाम नहीं किया,हमें समझना होगा कि इस तरह की घटना तभी रुक सकती है जब ‘ मै ‘ की भावना ख़त्म होकर ‘ हम ‘ की भावना का समावेश होगा और ऐसा तभी होगा जब हम किसी को सुनना शुरू करेंगे ,आज पूरी दुनिया में सुनने वाले लोगों की कमी है और जो लोगों को अच्छे से सुनते हैं वही काउंसलर बने हुए हैं और अपनी फीस लेकर लोगों से बात करते हैं।

सबसे पहले हमें ये जानना होगा कि जीवन का मुख्य लक्ष्य क्या है ?, ये सवाल मै आपसे भी करना चाहूंगा

पैसा ?

शोहरत ?

जी नहीं आप ठीक नहीं सोच रहे ,शायद आप जीवन जीने  के रास्तों को ही मुख्य उद्देश्य मान बैठे हैं,ऐसा सोचना ठीक नहीं है,पैसा या शोहरत कभी भी जीवन का मुख्य उद्देश्य नहीं बन सकता,बल्कि खुशियां ही एकमात्र जीवन का उद्देश्य है, मै पूछता हूं कि उन पैसों या शोहरत का क्या मतलब जो आपको चैन से जीने नहीं दे रही।

इसलिए आप भले ही थोड़ा कम पैसे कमाइए लेकिन जीवन को खुशनुमा बनाइए और कभी भी डिप्रेशन का फेस आए भी तो तुरंत मनोचिकित्सक से संपर्क करिए क्योंकि चिकित्सा का ये विभाग सिर्फ इन्हीं बातों के इर्द गिर्द है वही आपकी बेहतर मदद कर सकते हैं।

इसलिए बहुमूल्य जीवन को व्यर्थ में ना गंवाइए क्योंकि –

जान है तो जहान है।

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