खुशियां बांटिए अफवाहें नहीं

खुशियां बांटिए अफवाहें नहीं

कोरोनावायरस से जूझते हुए अमूमन ३ माह से अधिक समय हो गया है, और अभी भी पता नहीं कब तक इस लड़ाई में हम जीत हासिल कर पाएंगे,अभी तक की योजना के मुताबिक़ सामाजिक दूरी ही कारगर उपाय है इस अजीब से वायरस के प्रकोप से बचने का,इसलिए ही लोग पिछले ३ माह से घरों में बंद हैं और इंतज़ार में है कि कब तक ये वायरस से पूरे देश को आज़ादी मिलेगी।

हालांकि इस बीच लोग पैनिक भी हो रहे हैं यही नहीं कई लोग मानसिक अवसादग्रस्त भी हो जा रहे हैं,अभी समस्या यहीं नहीं ख़त्म होती,कई लोग कोरोना वायरस के भय के कारण भी परेशान हो जा रहे हैं ,नकारात्मकता पूरी तरह से घिर चुकी है, सकारात्मक किरणों का आवागमन लोगों ने स्वयं ही रोक दिया है,अफवाहों से पूरा वातावरण पटा हुआ है,तरह तरह के अफ़वाह लोग फैला दे रहे हैं,इस घड़ी में जहां खुशियां ही एकमात्र किरण है उसमे ये अफ़वाह लोगों की मानसिक तनाव का भी कारण बन रहा है।

ऐसे में आशा की किरणें ,खुशियों का एक बड़ा स्रोत लेकर आएंगी क्योंकि ऐसा बिल्कुल नहीं है कि लॉक डाउन के इस समय में सबकुछ बुरा ही हो रहा है,तमाम ऐसी चीज़ें हैं जो शायद ही हमें नसीब हो पाती जैसे :

– इतना वक़्त अपने परिवार के बीच बिताने का मौका शायद ही हमें फिर कभी मिल पाए।

स्वयं में बदलाव करने के नज़रिए से भी देखा जाए तो ये समय बहुत ही उपयुक्त है।

इस तनावपूर्ण समय में भी हम मेडिटेशन करके अपने आप को मानसिक रूप से स्वस्थ्य कर सकते हैं और अपनी ध्यान शक्ति भी बढ़ा सकते हैं।

इस समय हम अपने आहार पर भी विशेष ध्यान दे सकते हैं।

लॉक डाउन के इस समय में कई निजी कंपनियों ने अपने निशुल्क पाठ्यक्रम भी शुरू किए हैं हम उसमें शामिल होकर अपने कौशल का विकास कर सकते हैं।

तो ये तमाम चीजें हैं जिनकी मदद से हम स्वयं को खुश रख सकते हैं और इन अफवाहों से भी बच सकते हैं और एक विनती है लोगों से कि बिना सोचे समझे या जांच परखे किसी भी बात को किसी के सामने ना रखें,आपको नहीं पता शायद की वो बात सामने वाले को सीधे तौर पर कितना चोटिल कर सकती है।

घर पर रहें ,सुरक्षित रहें।

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