आत्मज्ञान और सकारात्मकता

आत्मज्ञान और सकारात्मकता

इंसान अपने जीवन काल में जो कुछ भी करता है वो कहीं ना कहीं ऊर्जा के स्रोत का इस्तेमाल ही होता है जो इंसान में गुप्त रूप से मौजूद होती है,जिसका स्वयं इंसान भी पता लगा पाने में असमर्थ होता है हालांकि ये ऊर्जा समय और परिस्थिति के मुताबिक़ इंसान को संबल प्रदान करती है इस ऊर्जा का सीधा संबंध आत्मा से होता है क्योंकि शरीर तो नश्वर है ,एक आत्मा ही है जो अप्रत्यक्ष चीज़ों को अपने अंदर समाहित किए हुए है,इसलिए ही ऐसा कहा भी जाता रहा है कि आत्मज्ञान पर अपना ध्यान केंद्रित करें क्योंकि यही एकमात्र शक्ति है जिस से इंसान अपनी क्षमता का आकलन करके , प्रगति पथ पर चलते हुए इश्वर तत्व में मिल जाता है।

आत्मा के विषय में एक विचारधारा, अद्वैतवाद का कहना है कि ईश्वर और आत्मा एक ही है इसमें भिन्नता नहीं है इसलिए जो अपनी आत्मा को जान जाता है वो कहीं ना कहीं ईश्वर के समीप पहुंच ही जाता है और आत्मा को जान लेने वाला सकारात्मकता का विशालकाय स्रोत बन सकता है,मेरी दृष्टि में इसके साक्षात् उदाहरण हैं :

स्वामी विवेकानन्द

दयानंद सरस्वती

गौतम बुद्ध

जिन्होंने ने अपनी आत्मा को जान कर विश्व भर में सकारात्मकता का संदेश दिया।

इस पूरे विश्व में धार्मिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो दो तरह की ऊर्जा जगत में व्याप्त है:

१.सकारात्मक ऊर्जा : ऐसी ऊर्जा जो इंसान को प्रगति पथ पर ले जाए और उसे जीवन के चरम लक्ष्य अर्थात् खुशी का बोध कराए उसे है हम सकारात्मक ऊर्जा के सकते हैं।

२.नकारात्मक ऊर्जा : ऐसी ऊर्जा जो इंसान के प्रगति पथ में अवरोध बन कर खड़ी हो जाए और दिमागी तौर पर इंसान को अंधा बना दे,उसे हम नकारात्मक ऊर्जा कह सकते हैं।

तो सकारात्मक ऊर्जा का संचार ही सकारात्मकता के लिए ज़िम्मेदार है।

जीवन में सकारात्मकता को अपनाने के बहुत से फायदे हैं:

सकारात्मकता और आत्मविश्वास दोनों एक समानांतर रेखा में चलते हैं,अर्थात् जहां सकारात्मकता है वहां आत्मविश्वास स्वयं ही स्थापित होने शुरू हो जाएगा और यही आत्मविश्वास जीवन के कठिन कार्य को भी सरल बना देती है।

हमारा शरीर नश्वर है ये सभी जानते है किन्तु हर इंसान फिर भी भय मुक्त नहीं हो पाता है ,एक शायर राजेश रेड्डी का एक शेर है जो इस वाक्य को बड़ी ही समझदारी से जाहिर करता है:

यहां हर शख़्स हर पल हादसा होने से डरता है,

खिलौना है जो मिट्टी का फना होने से डरता है।

लेकिन ये सकारात्मकता ही है जो इंसान को भयमुक्त कर जीवन को जीने की आस्था और विश्वास प्रदान करती है।

अंत में एक पंक्ति जीवन में सकारात्मकता बनाए रखने के लिए

तू चार दिन की चांदनी में मुस्कुराना सीख ले,

तू तार सप्तक की ध्वनि में गुनगुनाना सीख ले,

यह रात है कट जाएगी एक दिन सुबह तो आएगी,

तो उस सुबह की आस लेकर  जगमगाना सीख ले।

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