Yoga

Yoga in the modern age. How an ancient craft can redefine our future!

आज हम सिर्फ योग को बाहरी रूप में समझने जा रहे है। अध्यात्म योग और शारीरिक योग दोनों दो अलग अलग प्रक्रिया हैं जिन्हें हम फिर

 विस्तृत रूप से समझेंगे। अभी हम बात कर रहे है कि मुख्य रूप से योग का मतलब क्या है और कौन कौन से योग हमें सुनने में आते हैं।

योग प्राचीन समय से लेकर आज के आधुनिक युग तक प्रसिद्ध और प्रचलित है। योग आध्यात्मिकता से भी जुड़ा है तो दूसरी और स्वस्थ शरीर बनाये रखने का उपाय भी।

हर धर्म में योग की अलग परिभाषा है। बौद्ध धर्म , जैन धर्म और हिन्दू धर्म इन तीनो में योग का अधिक और विस्तृत वर्णन मिलता है और सबका मत अलग अलग है। बस समानता है तो सबमें एक ही के सबमे योग का मतलब मिलन है किसी में आत्मा परमात्मा का तो किसी में प्रकृति और आत्मा का। तरीके अलग अलग है कोई हठ योग को सही समझता है कोई राजयोग को। इन्हें भी समझना थोड़ा मुशिकल है।

योग एक आध्यात्मिक प्रक्रिया मानी जाती है जिसमें शरीर आत्मा और मन को एक साथ लाने (योग) का काम होता है।

योग का अर्थ जोड़, नियमन, योगफल समझा जा सकता है। किन्ही दो या दो से ज्यादा का मिलना योग है। योग को एक ही परिभाषा से नहीं समझा जा सकता।

इन सबसे अलग ये सत्य भी है कि योग भारत से प्रारंभ हुआ जो आज दुनिया के लगभग सभी सभ्य देशो में अपनी अलग जगह बना चुका है और इसिलए 21 जून को विश्व योग दिवस घोषित किया जा चुका है।

 दूसरी तरफ धार्मिक योग की बात करे तो उसमें मत अलग अलग है जैसे भगवद्गीता में 4 योग का जिक्र किया गया है जिसमे कर्म योग और ज्ञान योग पे विशेष रूप से जोर दिया गया है। इनके हिसाब से बिना किसी फल की इच्छा रखे मतलब किसी भी तरह के परिणाम को सोचे बिना अपना कर्म करना ही योग है।

श्री कृष्ण ने कहा भी है कि योगः कर्मसु कौशलम( योग से कर्मों में कुशलता आती है) अर्थात मन को शांत रख के कोई भी कर्म किया जाता है तो वो पूर्णतया सही ही होता है।

दूसरी तरफ पातंजल योग दर्शन में लिखा है कि चित्त ( मन) की वृतियों का निरोध(रोकना) योग है।विष्णु पुराण में कहा है जीवात्मा और परमात्मा का मिलन योग है।दुबारा भगवद्गीता में लिखा है कि हर भाव( जैसे सुख-दुःख, मित्र-शत्रु, सर्दी- गर्मी) में समभाव( एक जैसा) रहना योग है।

आज योग आध्यात्मिकता से ज्यादा स्वास्थ्य से  जुड़ा नजर आता है। योग शरीर के साथ साथ मन को भी स्वस्थ अर्थात शांत बनाता है। आज योग हम सबके लिए किसी वरदान से कम नहीं है। पूरे विश्व के डॉक्टर्स भी मानते है कि जो काम दवा नहीं कर सकती वो योग से संभव है। जो रोग असाध्य थे अब वो योग से ठीक होते देखे जा सकते है।

योग पहले सिर्फ एक ध्यान की अवस्था के रूप में देखा जाता रहा था लेकिन अब ध्यान के साथ साथ थोड़ा सा व्यायाम एक अद्भुत चमत्कार जैसा हो गया है।                      “कहते हैं न स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ आत्मा का निवास होता है।”

About the author

Nisha Shekhawat Adhikari

B.sc.(math)
MBA( HR & marketing)
She has participated in various functions as a speaker.
Content or blog writer by passion. She had written few blogs in DNA newspaper Jaipur and Some articles for college magazines.

25 Comments

Leave a Comment