#merasuvichar

समाज की समस्या!

समाज की समस्या!




आज तलक हमने महिला समाज से जुड़ी कई समस्याओं पर बात की है। लेकिन आज हम बात करते हैं पुरुष समाज की समस्याओं की।  जी हाँ सभ्य समाज में पुरूष वर्ग की हालत भी काफी दयनीय हो जाती है कई बार। अब जो पुरूष हैं वो तो समझ रहे होंगे लेकिन बाकी सबके लिए सवाल होगा कि कैसे?

 देखिए जहाँ  बेटे को तवोज्जो दी जाती है या जहाँ लड़का और लड़की दोनों को समान रूप से देखा और माना जाता है, वहाँ तो कोई दिक्कत आमतौर पर नहीं देखी जाती, लेकिन जहाँ लड़की की अपेक्षा लड़कों को कुछ नहीं समझा जाता, दिक्कत वहाँ आती है। बेटे को हमेशा छोटी छोटी बातों पर डांट देना जबकि बेटी की बड़ी से बड़ी गलती को भी नजरअंदाज कर देना। ये कई बार देखने और सुनने में साधारण सी बात लगती है, लेकिन ये उस बेटे के मन पर क्या प्रभाव छोड़ेगा ये उस बेटे के अलावा कोई और महसूस नहीं कर सकता। अक्सर कई घरों में बेटों को सिर्फ घर की जिम्मेदारी उठाने के लिए एक साधन समझा जाता है। वो बिना किसी शिकायत के बस लगा रहे अपने काम पर और   अगर कुछ बोलता है तो जैसे वो उसका सबसे बड़ा अपराध बन जाता है।




 और ये अक्सर पिता पुत्र के रिश्ते में ज्यादा देखने को मिलता है, क्योंकि ज्यादातर देखा गया है की पिता बेटे की बजाय बेटी को अपना ज्यादा प्यार देते हैं, और यही कारण होता है कि कई बार न चाहते हुए भी भाई और बहिन में भी कई बार दूरियां आ जाती हैं। और माँ बेटे का रिश्ता जो काफी भावनाओं और प्रेम से ओत प्रोत होता है, वह भी बेटे की शादी के बाद फीका पड़ने लगता है। बेटा बेचारा पत्नी और माँ के बीच सुलह ही कराने में आधी ज़िन्दगी गुजार देता है। पत्नी की न सुने तो कैसे गृहस्थ जीवन चले, और माँ की न सुने तो ‘बेटा बदल गया है बहू के आने से’ का ठप्पा उस पर लगाकर कुपुत्र की संज्ञा दे दी जाती है। आखिर बेचारा बेटा कहाँ जाएं। उसे पता होता भी है कि कौन सही है और कौन नहीं, फिर भी उसे दूसरों के हिसाब से अपना निर्णय बदलना पड़ता ही है। ये कहानी किसी एक की नहीं बल्कि लगभग हर मध्यम वर्गीय परिवार की रोज की कहानी है। तो महिलाएं सिर्फ खुद को ही बेबस और अकेला न समझें क्योंकि पुरूष भी बेचारे होते हैं।

About the author

Nisha Shekhawat Adhikari

B.sc.(math)
MBA( HR & marketing)
She has participated in various functions as a speaker.
Content or blog writer by passion. She had written few blogs in DNA newspaper Jaipur and Some articles for college magazines.

Leave a Comment