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सफलता का रहस्य क्या है? सफल कैसे बने ?

सफलता




सफलता का रहस्य इस बात में छुपा है कि आप सफलता किसे समझते हैं और जब सफलता के सही मायने आपको समझ आ जाते हैं तो आप उसे प्राप्त करने के लिए क्या करते हैं? दोस्तों अगर मैं आपसे एक सवाल पूछू तो क्या आप बिना समय लिए, या चलिये समय लेकर भी सही और एक जवाब देंगे? वो सवाल है आपने जीवन में क्या पाना है? क्या लक्ष्य है आपका? सवाल बहुत ही सीधा सरल है लेकिन इसका जवाब हममें से अधिकतर के लिए बहुत ही पेचिदा है। क्योंकि हम कभी खुद के लिए इतना समय निकालते ही नहीं कि खुद की पसंद नापंसद पर ध्यान दे सकें या उसके लिए कुछ कर सकें। बचपन माता पिता, अध्यापकों या रिश्तेदारों के कहे अनुसार निकलता है और वही आदत युवा अवस्था से लेकर कई बार वृद्धा अवस्था के प्रारम्भ तक बनी रहती है।
आपको हर मोड़ पर कोई सलाह देने वाला, राह दिखाने वाला, क्या करना है क्या नहीं ये बताने वाला चाहिए। माता पिता भी बड़े खुश होते हैं कि देखो इतना बड़ा हो गया लेकिन हमारा बेटा आज भी हमसे पूछे बिना कुछ नहीं करता। अब ये जानकर जरूर हैरानी होती है कि माता पिता से पूछे बिना प्रेम में पड़ना और शादी कर लेना तो बेटा या बेटी खुद ही निर्णय करके कर लेते हैं तो जीवन के बाकी फैसलों पर उन्हें हमेशा किसी और की आवश्यकता क्यों होती है? इसीलिये हमारे पास इस छोटे से सवाल का जवाब या तो है नहीं या है भी तो पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।
सफलता पाना इतना मुश्किल नहीं है लेकिन जब यही नहीं पता कि पाना क्या है तो सफल कैसे होंगे? एक सफल व्यक्ति और असफल व्यक्ति में यही एक बड़ा अंतर होता है। सफल व्यक्ति हमेशा अपना लक्ष्य निर्धारित करके रखता है। और उस लक्ष्य को पाने के लिए एक सही रास्ता चुनता है। और चल पड़ता है उस राह पर। अब चाहे कोई कुछ भी कहता रहे उसे फर्क नहीं पड़ता। लोगों की बातों में आकर जो रास्तों को बदलते रहते हैं वो अक्सर अपनी मंजिल तक पहुँच ही नहीं पाते। इसलिए सफल वही होता है जो अपने लक्ष्य को निर्धारित कर, अपने चुने हुए रास्ते पर चलता है और उस राह पर आई सभी कठिनाइयों को पार करते हुए आगे बढ़ता है।
परेशानियों से जो घबरा कर या थक कर बीच राह में या तो रुक जाता है या वापिस मुड़ जाता है उसे सफलता दूर दूर तक नसीब नहीं हो सकती। किनारा उसे ही मिलता है जो तूफान से लड़कर आगे बढ़ता है। गिरना नहीं है गिर कर, संभलने का नाम ही ज़िंदगी है। तो सफलता का मूल मंत्र या रहस्य है कि अपने लक्ष्य को ध्यान करते हुए, अपने चुने हुए मार्ग पर बाधाओं को पार करते हुए अथक और निरंतर चलते रहें।




सफलता में क्या हो सकता है आपकी परेशानी का कारण:-

कई बार आपने देखा होगा या खुद उस तजुर्बे से गुजर चुके होंगे कि हमारे पास कई अवसर एक साथ या एक के बाद एक आते हैं। हम उन अवसरों को पाकर या तो बहुत उलझन में पड़ जाते हैं या बहुत अधिक खुश हो जाते हैं, इतने खुश की हम अतिविश्वास से भर जाते हैं और हमें लगने लगता है कि हमारे पास अवसरों की कोई कमी नहीं है। सफलता का सबसे बड़ा दुश्मन यही है, अतिविश्वास(over confidence)। खुद पर विश्वास होना बहुत जरूरी है लेकिन इतना ज्यादा होना कि आपको लगने लगे कि आपको अवसर की नहीं बल्कि अवसर को आपकी जरूरत है तब सब कहानी उलट जाती है। इतिहास गवाह है जितने भी बड़े शासक या बादशाह हुए हैं उनके पतन का मुख्य कारण उनका अहंकार और अतिविश्वास ही था।




एक दूसरी समस्या है जो आपको सफल होने से रोकती है वो है, आपकी उलझन या कहें confusion.
आपको समझ ही नहीं आता कि आपको जो अवसर मिले हैं उनमें से कौनसा आपको चुनना है। कौनसा आपके लिए बेहतर है या आपके मन मुताबिक है? यहाँ फिर बात आती है कि आपने कभी खुद को समय दिया ही नहीं, तो आपको पता ही नहीं कि आपको करना क्या है?   अगर आपको अपना लक्ष्य पता हो तो आप निश्चित ही प्राप्त अवसर का लाभ उठा पाएंगे। वरना आप अवसर पाकर भी उसे खो देंगे और सफल होने के पायदान पर पहुँचने से पहले ही आप फिसल कर नीचे गिर चुके होंगे।
 हम अवसर को ठीक से न समझ कर बस एक चुन तो लेते हैं, लेकिन जैसे ही उसमें कोई परेशानी या कठिनाई आती है हम यही कहते हैं कि इससे अच्छा होता कि दूसरा अवसर ही चुन लेता। या फिर हम उस चुने हुए अवसर को बाधाओं से डर कर छोड़ देते हैं। और इस तरह से बाकी अवसर तो पहले ही गंवा दिए थे, और अब जो अवसर ग्रहण किया था उसे भी डर के मारे छोड़ दिया। तो सफलता आपको कैसे मिलेगी? सफलता कोई वस्तु तो है नहीं के जब चाहा खरीद लिया और जब नहीं चाहिए तो बेच दिया।
सफल व्यक्ति हजारों बाधाओं को पार करते हुए उस मुकाम को हासिल करता है जिसे देख कर हम प्रेरित होते हैं।हजारों लाखों को प्रेरणा देने वाले वो कुछ सफल व्यक्ति हममें में से ही एक थे लेकिन उनकी निर्णय लेने की क्षमता और मुश्किलों से डट कर सामना करने की शक्ति ही उन्हें हमसे अलग करती है। और जो अवसर को ये सोच कर छोड़ते या बदलते रहते हैं कि शायद अगला अच्छा होगा, फिर तीसरा फिर चौथा और इस तरह कई सुनहरे अवसर छोड़ते गए और आखिर में आपके पास बचेगी तो सिर्फ असफलता।
ऐसा नहीं है कि असफल होने वाले लोग मेहनत नहीं करते या ऐसे लोगों में लगन की कमी और योग्यता की कोई कमी होती है। कमी होती है तो धैर्य और आत्मविश्वास की।
ऐसे लोग एक अवसर को अपनाकर सफलता के रास्ते की ओर चल देते हैं लेकिन यदि रास्ते में कोई परेशानी आती है तो दूसरा अवसर तलाशने लगते हैं और अंततः असफलता का मुख देखते हैं। जबकि बहुत कम ऐसे लोग होते हैं जो जीवन में मिलने वाले सीमित समय में ही अपने मनमुताबिक के किसी एक अवसर या रास्ते को अपनाकर अपनी सफलता के रास्ते पर चल देते हैं। रास्ते में आने वाली हर बाधा को हल करते हुए आगे बढ़ते जाते हैं.
वह किसी दूसरे के कहने पर या परेशानियों से घबराकर अपना अवसर या रास्ता नहीं बदलते हैं और जीवन में सही समय पर सफलता को प्राप्त कर लेते हैं.

सफलता का रहस्य लोगों ने अपने अपने ढंग से परिभाषित किया है.

कलाम सर ने कहा है,

“अपने मिशन में सफल होने के लिए, आपको अपने लक्ष्य के प्रति एकचित निष्ठावान होना पड़ेगा”

क्रिकेट प्रेमियों के नायक विराट कोहली का कहना है,

” आत्मविश्वास और कड़ी मेहनत से आप हमेशा सफलता प्राप्त करते हैं.”

महान लेखक रोबिन शर्मा के अनुसार सफलता भाग्य में कम और अभ्यास में अधिक होती है.

और हम सबके आज के महानायक हमारे प्रधानमंत्री मोदी जी कुछ इस तरह  सफलता का रहस्य परिभाषित करते हैं;-
इच्छा + स्थिरता = संकल्प
संकल्प + कड़ी मेहनत = सफलता।।
सबका मूल एक ही है, सही निर्णय, उसमें स्थिरता और कड़ी लगन और मेहनत यही हैं सफलता का रहस्य . इसके अलावा कोई जप तप नहीं जो सफलता दिला सके.

About the author

Nisha Shekhawat Adhikari

B.sc.(math)
MBA( HR & marketing)
She has participated in various functions as a speaker.
Content or blog writer by passion. She had written few blogs in DNA newspaper Jaipur and Some articles for college magazines.

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