Yoga

ध्यान में स्थिर रहने का सरल तरीका !

ध्यान में स्थिर रहने का सरल तरीका !

“ध्यान को स्थिर रखने के लिए सरल साधना।।”

ध्यान या योग को करने की विधि जितनी आसान और सरल प्रतीत होती है, असल में उतनी ही जटिल और कठिन होती है आजमाने में। और ये जटिलता विधि में नहीं अपितु हमारी जीवन शैली में है। जन्म से हमें एक नाम एक पहचान मिलती है। और यह पहचान ताउम्र हमारे साथ बनी रहती है। हम इसी पहचान को “स्वयं” समझते हैं लेकिन हकीकत कुछ ओर ही होती है।
सम्पूर्ण जीवन हम जिस स्वयं को हम जानते है वो दरसअल नाशवान शरीर होता है, जबकि “मैं” शरीर नहीं आत्मा हूँ। शरीर के नशे में हम इतना डूबेे हुए होते हैं कि हमें वास्तविकता का बोध होना बेहद मुश्किल हो जाता है।
मान लीजिये आपकी उम्र 40 वर्ष है और अब आपका मन आध्यात्म की तरफ झुकने लगा है। आप ध्यान में बैठना चाहते हैं, योग या साधना करना चाहते हैं। अब आप जानते हैं कि आप शरीर नहीं आप अजर, अमर ज्योतिबिन्दु समान एक आत्मा हैं। जो बेहद शक्तिशाली, पवित्र और निरपराध है। लेकिन पिछले 40 सालों का क्या जिसमें खुद को एक शरीर समझा, आपका एक नाम है पहचान है, एक जाति है, एक धर्म है, एक परिवार है उसकी जिम्मेदारियां हैं। ये सब आप एक पल में ही भूल सकते हैं? नहीं ना। इसीलिए ध्यान में स्थिर रहना मुश्किल होता है। लेकिन ये असंभव नहीं है और ना ही ऐसा है कि 40 साल से जो आपने सोचा है खुद के लिए उसे सही करने में आपको 40 साल ही लगेंगे। लेकिन ऐसा एक पल में ही हो जाये यह भी संभव नहीं है।
ध्यान के लिए जो विधि है बहुत सरल है लेकिन उसके लिए आपको पहले का ज्ञात सब कुछ भूलना होगा। सदगुरू इस बारे में कहते हैं “किसी खास दिशा में ध्यान स्थिर रखने के लिए सबसे पहले उन सभी गलत और मिथ्या धारणाओं को खत्म करना होगा, जो हमारे भीतर बनी हुई हैं। इसका मतलब हुआ कि अपने हर विश्वास को भुलाकर एक तरफ रख देना होगा। आप कहेंगे कि आपके विश्वास सामाजिक जीवन के लिए उपयोगी हैं। ठीक है।
लोगों के बीच रहने के लिए कुछ लेन-देन करना पड़ता है, उसके लिए आपको कुछ चीजों पर विश्वास करना होता है, यहां तक तो ठीक है। लेकिन इसके अलावा अपनी हर धारणा को कम कीजिए। जब आप अपने विश्वास व धारणाओं को अलग रख देते हैं तो आपको ऐसा लगेगा कि आप भोंदू या निपट मूर्ख हैं। अगर आपको ऐसा लगता है तो बहुत अच्छा है। यह जानना बहुत अच्छा है कि आप एक निपट मूर्ख हैं। एक आत्म-ज्ञानी और एक मूर्ख में बस इतना ही अंतर होता है कि ज्ञानी व्यक्ति जानता है कि वह मूर्ख है, जबकि मूर्ख यह नहीं जानता कि वह मूर्ख है। बस यही एक बड़ा अंतर है और यह जमीन आसमान का अंतर है। लोगों की समस्या सिर्फ इतनी है कि उनको पता ही नहीं होता कि वे किस जाल में फंसे हैं। अगर उन्हें पता होता तो क्या वे उसमें फंसे रहना चाहते? वे बिल्कुल वहां नहीं रहना चाहते।”

सरल ध्यान प्रक्रिया:

रात में जब आप सोने जाएं तो उससे पहले आप बिस्तर पर बैठ कर मानसिक तौर पर हर वो चीज उठाकर एक तरफ रख दीजिए, जो आप नहीं हैं। अपने से जुड़ी हर चीज, जैसे अपनी जाति, अपना धर्म, अपनी राष्ट्रीयता, अपना शरीर, अपना मन, अपना विचार, अपनी भावनाएं, अपनी सोच, अपना दर्शन, अपने भगवान, अपना शैतान, यानी हर चीज को खुद से अलग करें और बस सो जाएं।
यह काम रोज कीजिए, आपको अनुभव हो जाएगा। सिर्फ सोना है, इससे आसान तरीका कोई नहीं हो सकता। बस आप ऐसे ही सो जाएं – जीवन के एक अंश के रूप में बस ऐसे ही सो जाइए, न एक स्त्री के रूप में, न एक पुरुष के रूप में, न इस रूप में न उस रूप में, बस सामान्य रूप से सो जाइए। दरअसल, जब आप सोते हैं तो आप ऐसे ही होते हैं। मतलब आप जब नींद में प्रवेश करें तब भी आप ऐसे ही रहें। इसके लिए आपको इतना करना है कि जो आपकी स्वाभाविक स्थिति नींद में होने वाली है, वही स्थिति आप सोने से सिर्फ कुछ मिनट पहले तैयार कीजिए। आप देखेंगे कि इसमें कुछ मेहनत लगेगी, लेकिन आप इसे कीजिए। वैसे भी जब आप नींद में होते हैं तो आपके सोने का न कोई चाइनीज तरीका होता है न अंग्रेजी तरीका। आप अंग्रेजी या फ्रेंच में नहीं सोते हैं। जब आप सोते हैं तो ऐसे कि मानो आप कुछ हैं ही नहीं। आप उसी तरह से ‘कुछ हैं ही नहीं’ के अंदाज में नींद के करीब जाइए। इस काम में कुछ मेहनत लगेगी, लेकिन इसे आज से ही करना शुरू कर दीजिए, क्योंकि कल के बारे में कौन जानता है?
Meditation
जितनी भी पहचान अपने ऊपर थोपी हुई हैं, उन सबका कोई मतलब नहीं है। आप बिस्तर पर जाने से पहले उन सबको एक तरफ रख दीजिए और फिर इस तरह सोने जाइए कि मानो कुछ है ही नहीं। कुछ विचार आते रहेंगे, उन्हें अनदेखा कर दीजिए, वैसे भी वे आपके नहीं हैं। सिर्फ लेट जाइए। सिर्फ इतना करने की जरूरत है कि आपको अपना ध्यान ‘जो आपने अब तक इकठ्ठा किया हुआ है’ उससे हटाकर ‘जो आप वास्तव में हैं’ उस पर लगाना है। यही आपको सही दिशा देगा। इसके लिए आपको स्वर्ग की ओर देखने की कोई जरूरत नहीं है।
अलग अलग मत को मानने वाले ध्यान की प्रक्रिया भी अलग अलग बताते हैं, कोई कहता है ध्यान ब्रह्ममुहूर्त में किया जाता है, तो कोई सोने से पहले,तो कोई कहता है जब आप चाहें। कोई इसे ध्यान, समाधि कहता है कोई राजयोग।लेकिन सभी का मकसद एक ही है और वो है शरीर के भान से दूर होकर आत्मा का बोध करना। देखिए ये निश्चित है कि आप जिस भी समय, जिस भी जगह योग लगाने बैठेंगे तो आपके दिमाग में आत्मा और परमात्मा का बोध होने के अलावा बाकी सब ध्यान आएगा। जो दिन भर आप नहीं भी सोचते हैं, ध्यान में बैठने पर वह भी याद आएगा। क्योंकि आपके मन को एक जगह टिकने की आदत नहीं है। वह बहुत सारे सांसारिक कार्यों में लीन है। उसे अचानक से शांति पसंद नहीं आती। लेकिन आपको घबराने की बिल्कुल भी आवश्यकता नहीं है क्योंकि आपको इसी मन पर ही तो विजय प्राप्त करनी है। मन जाएगा कि व्यापार में आज क्या रहेगा, लेकिन आपको उसे समझाना है कि जो होगा वो बाद का विषय है मुझे उस बारे में कुछ नहीं सोचना। मैं व्यापारी नहीं मैं एक शान्त आत्मा हूँ। बस इस तरह आपको हर विचार को मोड़ देना है। अभ्यास करना होगा, समय लगेगा लेकिन आप इसे अवश्य कर पाएंगे अगर आप करना चाहते हैं वास्तव में तो।

ध्यान के लिए बस कुछ बातें मेरे विचार से ध्यान रखने योग्य हैं:-

– आप नित्य रूप से सतसंग या इस तरह के किसी भी ईश्वरीय सतसंग को सुने। इसके लिये स्वयं के विवेक का प्रयोग करें क्योंकि धर्म के नाम पर धोखा भी खुले आम होता है आजकल।
– अपना आहार शुद्ध रखें। आपके आहार का आपके मन मस्तिष्क पर पूरा पूरा प्रभाव पड़ता है।
– पवित्रता का पालन करें।
– क्रोध पर विजय प्राप्त करें, मन को कुछ अच्छे कार्यों में व्यस्त रखें।
– इस बात पर गौर करें कि दिन भर आप कोई भी ऐसा कार्य न करे जिससे आपको आत्मग्लानि हो या कोई भी परेशानी हो। क्योंकि जब आप ध्यान मुद्रा में बैठेंगे तो पूरे दिन का क्रियाकलाप आपको याद आएगा और आपका ध्यान में मन नहीं लग पाएगा।
– आवश्यक नहीं आप किसी मंदिर,मस्जिद या चर्च जाएं। बस ईश्वर के बताए सदमार्ग पर चलने का भरसक प्रयत्न करें और विवेकशील बने रहें।
ध्यान में स्थिर रहने के लिए आपको सिर्फ खुद को सब बातों से परे रखना है। गलत धारणाओं को खत्म करना होगा और सत्य को अपने विवेक से पहचानना होगा। याद रखिए इस जीवन में जो कुछ भी आपको मिला है वो सब क्षणभंगुर है, जो सदा के लिए है वो है आप यानी आत्मा।

About the author

Nisha Shekhawat Adhikari

B.sc.(math)
MBA( HR & marketing)
She has participated in various functions as a speaker.
Content or blog writer by passion. She had written few blogs in DNA newspaper Jaipur and Some articles for college magazines.

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