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तिलक धारण करने का कारण, महत्त्व और नियम!

तिलक धारण करने का कारण, महत्त्व और नियम!




तिलक, टीका पूरे विश्व में कहीं प्रचलित है तो वो है भारत देश. यही वो देश है जहाँ आध्यात्म और विज्ञान साथ साथ चलते हैं. हर परम्परा हर रिवाज के पीछे कोई न कोई वैज्ञानिक तथ्य जुड़ा होता है. तिलक लगाना भी उन्हीं परम्पराओं में से एक है. माथे पर तिलक लगाने की संस्कृति अत्यधिक प्राचीन है. माना जाता है कि मनुष्य के मस्तिष्क के मध्य में भगवान विष्णु का निवास होता है. इसीलिए तिलक ठीक उसी स्थान पर लगाया जाता है. तिलक कई प्रदार्थों से लगाया जाता है, जिनमें चंदन, सिंदूर, हल्दी, भस्म, केसर आदि प्रमुख हैं.
तिलक क्यों लगाते हैं?
इस सवाल के कई जवाब मिलते हैं, जैसे एक विष्णु जी का निवास स्थान है, तो दूसरा कारण पुराणों के अनुसार माना जाता है कि संगम तट पर गंगा स्नान के पश्चात टीका लगाने से मोक्ष प्राप्त होता है.
आध्यात्म कारण बहुत सारे हो सकते हैं लेकिन इनका वैज्ञानिक तथ्य है कि हमारे शरीर में सात सूक्ष्म ऊर्जा केंद्र होते हैं, जो अपार शक्ति का भंडार होते हैं. इन्हें चक्र कहते हैं. मस्तक के मध्य जहाँ तिलक लगाते हैं, उसे आज्ञा चक्र कहते हैं. यह चक्र हमारे शरीर का सबसे महत्त्वपूर्ण स्थान है, जहाँ शरीर की तीन प्रमुख नाड़ियां ; इड़ा, पिंगला और सुषुम्ना आकर मिलती हैं. इसीलिए इसे त्रिवेणी या संगम भी कहते हैं. यह गुरु स्थान कहलाता है. यहीं से पूरे शरीर का संचालन होता है. यही हमारी चेतना का मुख्य स्थान भी है. इसी को मन का घर भी कहा जाता है. इसी कारण यह स्थान शरीर में सबसे ज्यादा पूजनीय है. योग में ध्यान के समय इसी स्थान पर मन को एकाग्र किया जाता है.
टीका लगाने से स्वभाव में सुधार आता हैै व देखने वाले पर सात्विक प्रभाव पड़ता है. तिलक जिस भी पदार्थ का लगाया जाता है उस पदार्थ की ज़रूरत अगर शरीर को होती है तो वह भी पूर्ण हो जाती है. तिलक किसी खास प्रयोजन के लिए भी लगाये जाते हैं जैसे यदि मोक्षप्राप्ति करनी हो तो तिलक अंगूठे से, शत्रु नाश करना हो तो तर्जनी से, धनप्राप्ति हेतु मध्यमा से तथा शान्ति प्राप्ति हेतु अनामिका से लगाया जाता है.
मनोविज्ञान की दृष्टि से भी टीका लगाना उपायोगी माना गया है. माथा चेहरे का केंद्रीय भाग होता है, जहाँ सबकी नजर अटकती है. स्त्रियां लाल कुमकुम का टीका लगाती हैं, वह भी बिना प्रयोजन नहीं है. लाल रंग ऊर्जा और स्फूर्ति का प्रतीक है. तिलक स्त्रियों के सौंदर्य में वृद्धि करता है. तिलक देवी की आराधना से भी जुड़ा है. देवी की पूजा के बाद टीका लगाया जाता है. तिलक देवी के आशीर्वाद का प्रतीक माना जाता है.
तंत्र शास्त्र के अनुसार मस्तक को इष्ट देव का प्रतीक माना जाता है, हमारे इष्ट देव की स्मृति सदैव बनी रहे, ताकि मन मस्तक के केंद्र बिंदु को बार बार याद रखे. इससे सारी चेतना धीरे धीरे आज्ञा चक्र पर केंद्रित हो जाती है, क्योंकि चेतना सारे शरीर में फैली होती है. इसीलिए तिलक के माध्यम से ध्यान को आज्ञा चक्र पर केंद्रित कर तीसरे नेत्र को जागृत कर सकें ताकि हम परामानसिक जगत में प्रवेश कर सकें.
तिलक का हमारे जीवन में इतना महत्त्व है कि शुभकार्यों, अनुष्ठानों, संस्कारों, त्यौहार से लेकर युद्ध में विजयी होने तक के लिए टीका लगाएं जाते हैं.
आम तौर पर चंदन, कुमकुम, मिट्टी, हल्दी, भस्म आदि का टीका लगाने का विधान है. अगर कोई टीका लगाने का लाभ तो लेना चाहता है, पर दूसरों को यह दिखाना नहीं चाहता, तो शास्त्रों में इसका भी उपाय बताया गया है. कहा गया है कि ऐसी स्थ‍िति में ललाट पर जल से तिलक लगा लेना चाहिए. इससे लोगों को प्रत्यक्ष तौर पर कुछ लाभ बड़ी आसानी से मिल जाते हैं.




अब तिलक धारण करने के फायदों की चर्चा करते हैं.

1. तिलक धारण करने से व्यक्त‍ित्व प्रभावशाली हो जाता है. टीका लगाने का मनोवैज्ञानिक असर होता है, क्योंकि इससे व्यक्त‍ि के आत्मविश्वास और आत्मबल में भरपूर इजाफा होता है.
2. ललाट पर नियमित रूप से तिलक लगाने से मस्तक में तरावट आती है. लोग शांति व सुकून अनुभव करते हैं. यह कई तरह की मानसिक बीमारियों से बचाता है.
3. दिमाग में सेराटोनिन और बीटा एंडोर्फिन का स्राव संतुलित तरीके से होता है, जिससे उदासी दूर होती है और मन में उत्साह जागता है. यह उत्साह लोगों को अच्छे कामों में लगाता है.
4. इससे सिरदर्द की समस्या में कमी आती है.
5. हल्दी से युक्त टीका लगाने से त्वचा शुद्ध होती है. हल्दी में एंटी बैक्ट्र‍ियल तत्व होते हैं, जो रोगों से मुक्त करता है.
6. धार्मिक मान्यता के अनुसार, चंदन का टीका लगाने से मनुष्य के पापों का नाश होता है. लोग कई तरह के संकट से बच जाते हैं. ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, टीका लगाने से ग्रहों की शांति होती है.
7. माना जाता है कि चंदन का टीका लगाने वाले का घर अन्न-धन से भरा रहता है और सौभाग्य में बढ़ोतरी होती है.
8.  आज्ञा चक्र पर तिलक करने से आज्ञाचक्र को नियमित रुप से उत्तेजना मिलती रहती है. इससे सजग रुप में हम भले ही उससे जागरण के प्रति अनभिज्ञ रहें, पर अनावरण का वह क्रम अनवरत चलता रहता है. मनुष्य ऊर्जावान, तनावमुक्त, दूरदर्शी, विवेकशील होता है. उसकी समझ अन्य की तुलना में अधिक होती है.

इन सब महत्त्व और लाभ के अलावा तिलक लगाने के भी कुछ नियम हैं जिन्हें हमें ध्यान रखना चाहिए. जैसे

– कभी भी देवी देवताओं के ललाट पर सिंदूर नहीं लगाना चाहिए। सिंदूर गर्म का प्रतीक है.
– जिस व्यक्ति का तिलक करना है उसका मुख उत्तर दिशा में होना चाहिए.
– शास्त्रों में 12 जगह टीका करना बताया गया है; वो हैं मस्तक, ललाट, कंठ, हृदय, दोनों भुजाएं, बाहुमूल, नाभि, पीठ और दोनों बगल.
– शिव भक्तों को तीन आड़ी रेखाओं से बना त्रिपुंड लगाए जाने की मान्यता है.
– देवी देवताओं के अनुसार भी टीका अलग अलग लगता है जैसे शिव को भस्म, विष्णु को पीला चंदन, ऋषि पूजा में श्वेत चंदन, मानव पूजा में केसर व चंदन, लक्ष्मी पूजा में केसर तिलक, और तंत्र साधना में लाल सिंदूर लगाया जाता है.
– अंगुलियों में से यदि मध्यमा से टीका किया जाए तो आयु बढ़ती है, अनामिका से शांति, अंगूठे से तिलक पुष्टि देने वाला होता है.
– दैविक कार्य में अनामिका उंगली काम में लें, तंत्र साधना में प्रथम, गुरु कार्य में कनिष्टिका उंगली और पितृ कार्य में मध्यमा उंगली से तिलक करना शुभ होता है.
तो इस तरह हमने देखा कि तिलक धारण करना सिर्फ हमारी परंपरा ही नहीं अपितु मनोवैज्ञानिक लाभ से भी परिपूर्ण है. यह सिर्फ आध्यात्म नहीं विज्ञान भी है. तिलक धारण करने से शरीर में ऊर्जा और स्फूर्ति का संचार होता है.

About the author

Nisha Shekhawat Adhikari

B.sc.(math)
MBA( HR & marketing)
She has participated in various functions as a speaker.
Content or blog writer by passion. She had written few blogs in DNA newspaper Jaipur and Some articles for college magazines.

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