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डॉक्टर कलाम की जीवनी!

डॉक्टर कलाम की जीवनी!

15 अक्टूबर 1931 को रामेश्वरम के  धनुषकोडी गांव में जन्म लिया एक महान व्यक्ति ने, जिसे आज हम सब मिसाइल मैन के नाम से जानते हैं। डॉक्टर ए. पी.जे.कलाम और पूरा नाम अबुल पकिर जैनुलाअबदीन अब्दुल कलाम। कलाम साहब ने जिस घर में और हालात में जन्म लिया उन सबको दरकिनार करते हुए वो आज हम सबके लिए एक मिसाल बन चुके हैं। जीवन में कोई भी बाधा इतनी बड़ी नहीं हो सकती कि वो आपके इरादों को नेस्तनाबूद कर सके, यही बात कलाम सर ने हमको सिखाई है।

इनका जन्म एक मध्यमवर्गीय मुस्लिम परिवार में हुआ। परिवार में इनकेे 5 भाई और 5 बहिनें थीं और 3 परिवार साथ रहता था। तो इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस संयुक्त परिवार में कितने सदस्य रहे होंगे। यहाँ सदस्यों की संख्या गिनाकर मैं कोई कटाक्ष या किसी विशेष समुदाय की कमजोरी नहीं गिना रही अपितु सिर्फ यह बताना चाह रही हूँ कि सबके साथ रहते हुए भी मुकाम हासिल किया जा सकता है, उसके लिए नितान्त एकांत या व्यक्तिगत स्थान आवश्यक नहीं है। जरूरत है तो आपके ध्यान और जज्बे की।
कलाम सर के पिता जैनुलाब्दीन न तो ज़्यादा पढ़े-लिखे थे, न ही पैसे वाले थे।इनके पिता मछुआरों को नाव किराये पर दिया करते थे। अब्दुल कलाम के जीवन पर इनके पिता का बहुत प्रभाव रहा। वे भले ही पढ़े-लिखे नहीं थे, लेकिन उनकी लगन और उनके दिए संस्कार अब्दुल कलाम के बहुत काम आए।पाँच वर्ष की अवस्था में रामेश्वरम के पंचायत प्राथमिक विद्यालय में उनका दीक्षा-संस्कार हुआ था। उनके शिक्षक इयादुराई सोलोमन ने उनसे कहा था कि जीवन में सफलता तथा अनुकूल परिणाम प्राप्त करने के लिए तीव्र इच्छा, आस्था और अपेक्षा इन तीन शक्तियों को भलीभाँति समझ लेना और उन पर प्रभुत्व स्थापित करना चाहिए।
अब्दुल कलाम ने अपनी आरंभिक शिक्षा जारी रखने के लिए अख़बार वितरित करने का कार्य भी किया था।कलाम जी ने 1958 में मद्रास इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से अंतरिक्ष विज्ञान (space science) में स्नातक की उपाधि प्राप्त की है। स्नातक होने के बाद उन्होंने हावर क्राफ्ट परियोजना पर काम करने के लिये भारतीय रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) में प्रवेश किया। 1962 में वे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) में आये जहाँ उन्होंने सफलतापूर्वक कई उपग्रह प्रक्षेपण परियोजनाओं में अपनी भूमिका निभाई। परियोजना निदेशक के रूप में भारत के पहले स्वदेशी उपग्रह प्रेक्षेपण यान एसएलवी 3 के निर्माण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई जिससे जुलाई 1982 में रोहिणी उपग्रह सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में प्रक्षेपित किया गया था।
इन्हें बैलेस्टिक मिसाइल और प्रक्षेपण यान प्रौद्योगिकी के विकास के कार्यों के लिए भारत में मिसाइल मैन के रूप में जाना जाने लगा।
कलाम अपने व्यक्तिगत जीवन में पूरी तरह अनुशासन का पालन करने वालों में से थे। ऐसा कहा जाता है कि वे कुरान( इस्लाम धर्म की धार्मिक किताब) और भगवद्गीता (हिंदुओं की आध्यात्मिक किताब) दोनों का अध्ययन करते थे।कलाम ने कई स्थानों पर उल्लेख किया है कि वे तिरुक्कुरल (तिरुक्कुरल,तमिल भाषा में लिखित एक प्राचीन मुक्तक काव्य रचना है। तिरुवल्लुवर इसके रचयिता थे। कई विद्वान तिरुक्कुरल को एक जैन रचनाकार माना जाता हैं। इसका प्रथम अध्याय ईश्वर-स्तुति है, जिसमे जैन धर्म के प्रथम तीर्थकर ऋषभदेव की स्तुति की गयी है।)का भी अनुसरण करते थे, उनके भाषणों में कम से कम एक कुरल का उल्लेख अवश्य रहता था।
राजनीतिक स्तर पर कलाम साहब की चाहत थी कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत की भूमिका का विस्तार हो। भारत को महाशक्ति बनने की दिशा में कदम बढाते देखना उनकी दिली चाहत थी।उनका कहना था कि 2000 वर्षों के इतिहास में भारत पर 600 वर्षों तक अन्य लोगों ने शासन किया है। यदि आप विकास चाहते हैं तो देश में शांति की स्थिति होना आवश्यक है और शांति की स्थापना शक्ति से होती है। इसी कारण प्रक्षेपास्त्रों को विकसित किया गया ताकि देश शक्ति सम्पन्न हो।
उन्होंने कई प्रेरणास्पद पुस्तकों की भी रचना की थी और वे तकनीक को भारत के जनसाधारण तक पहुँचाने की हमेशा वक़ालत करते रहे थे। बच्चों और युवाओं के बीच डाक्टर क़लाम अत्यधिक लोकप्रिय थे। वे जीवनभर शाकाहारी रहे।
2002 में उनके प्रति भारत की जनता में सम्मान देखते हुए, जीवन की उपलब्धियों तथा भारत के प्रति उनका लगाव देखते हुए एन. डी. ए. ने उन्हें राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित किया। फलस्वरूप वह चुनाव में विजयी होकर 2002 में भारत के राष्ट्रपति के रूप में हमारे सामने आये | उन्हें “जनता का राष्ट्रपति कहकर संबोधित किया जाने लगा।
डॉक्टर कलाम ऐसे शख्स थे जो एक ग़रीब परिवार से आये और अपनी मेहनत और अनुशासन के कारण एक सफल वैज्ञानिक, एक लोकप्रिय राष्ट्रपति तथा एक आदर्श प्रोफेसर बन गए।अगर हम इनके जीवन का गहन अध्ययन करेंगे तो जान पाएंगे कि हालात को जिम्मेदार ठहराते हुए हार मानकर बैठने वाले लोग कभी आगे नहीं बढ़ते। विश्व भर के लोग, बच्चों के प्रति उनके स्नेह, उनकी सरलता तथा विनम्रता की प्रशंसा किया करते हैं। कलाम साहब में सीखने की जबरदस्त ललक और चाह थी। इतनी विश्व प्रसिद्धि पाने के बाद भी वह बेहद सरल और साधारण इंसान थे। यही एक सफल व्यक्ति की पहचान भी होती है, विनम्रता। विनम्रता व्यक्ति का वो आभूषण है जो उसे भीड़ से अलग करता है।
कलाम जी कहते थे, “सबसे उत्तम कार्य क्या होता है? किसी इंसान के दिल को खुश करना, किसी भूखे को खाना देना, ज़रूरतमंद की मदद करना, किसी दुखियारे का दुःख हल्का करना और किसी घायल की सेवा करना…”।
Dr APJ Abdul Kalam
डॉ ए.पी.जे अब्दुल कलाम वास्तव में देश के सभी युवाओं के लिये एक सच्चे दिग्गज थे। अपने पूरे जीवन, पेशे, कार्य और लेखन के माध्यम से नयी पीढ़ी को उन्होंने हमेशा प्रेरणा दी है।
11वें राष्ट्रपति के रुप में वर्ष 2002 से 2007 तक देश की सेवा की। राष्ट्रपति के अपने कार्यकाल को पूरा करने के बाद, वो अपने नागरिक जीवन के लेखक, शिक्षा और लोक सेवा में लौट आये। अब्दुल कलाम ने इसरो और डीआरडीओ के विभिन्न मुख्य पदों पर अपनी सेवा प्रदान की और उसके बाद भारत के कैबिनेट मंत्रालय में भारत सरकार के मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार बने।
देश के सर्वोच्च तीन नागरिक सम्मान (पद्म भूषण 1981, पद्म विभूषण 1990, भारत रत्न 1997) के साथ ही उन्हें कम से कम 30 विश्वविद्यालयों के द्वारा डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया गया। वो एक महान व्यक्तित्व के साथ ही साथ देश के युवाओं के लिये एक प्रेरणास्रोत भी थे जिन्होंने अचानक हृदयगति रुक जाने के कारण 27 जुलाई 2015 को आईआईएम मेघालय में अपनी आखिरी साँसे लीं। वो शारीरिक रुप से भले ही हमारे बीच में मौजूद नहीं हों लेकिन फिर भी उनके देश के लिये किये गये महान कार्य और योगदान हमेशा हमारे साथ रहेंगे। अपनी किताब “भारत 2020 – नवनिर्माण की रुपरेखा” में उन्होंने भारत को एक विकसित देश बनाने के अपने सपने को उल्लेखित किया है।
बहुमुखी व्यक्तित्व के धनी कलाम कविता के शौकीन थे। उनके प्रिय कवि सुब्रमनिया भारती थे। डॉ कलाम आजीवन अविवाहित रहे।
भारतीयों के दिल में कलाम साहब के लिए विशेष सम्मान है। इसलिए उनके मरणोपरांत हैदराबाद स्थित डीआरडीओ के रिसर्च सेंटर की इमारत का नाम बदलकर एपीजे अब्दुल कलाम मिसाइल सेंटर रख दिया गया। चेन्नै स्थित एकेडमी ऑफ़ साइंस एंड इनोवेटिव रिसर्च (एसीएसआइआर) ने अपने समर ट्रेनिंग कार्यक्रम का नाम कलाम फेलोशिप रख दिया। लखनऊ की यूपी टेक्नीकल यूनिवर्सिटी का नाम उनके नाम पर रख दिया गया।

कलाम साहब ने अपने जीवन में कई पुस्तकें भी लिखी।

जिनके नाम हैं:
Wings of Fire(An Autobiography: APJ Abdul Kalam With Arun Tiwari), 2020 – A Vision for the New Millenium(APJ Abdul Kalam With YS Rajan), Envisioning an Empowered Nation(Technology for Societal Transformation: APJ Abdul Kalam With A Sivathanu Pillai), Ignited Minds
(Unleashing The Power Within India: APJ Abdul Kalam), My Journey
(APJ Abdul Kalam), Developments in Fluid Mechanics and Space Technology
(R Narasimha and APJ Abdul Kalam), The Life Tree
(Poems: APJ Abdul Kalam
Painting illustrations by Manav Gupta),The Luminous Sparks
(A biography in verse and colours: APJ Abdul Kalam),Mission India
(A Vision for Indian Youth: APJ Abdul Kalam with YS Rajan), Children Ask Kalam
(Children and APJ Abdul Kalam), Guiding Souls
(Dialogues on the Purpose of life: APJ Abdul Kalam with Arun K Tiwari), Inspiring Thoughts
(by APJ Abdul Kalam)

डॉक्टर कलाम ने बहुत कुछ सिखाया है हम सभी को, उन्हीं के विचारों में से कुछ सीख मैं आपसे साझा कर रही हूँ।

 Dr APJ Abdul Kalam

– बारिश की दौरान सारे पक्षी आश्रय की तलाश करते हैं लेकिन बाज़ बादलों के ऊपर उडकर बारिश को ही नजरअंदाज कर देते हैं। समस्याए आम हैं, लेकिन आपका रवैया इनमें अंतर पैदा करता है।
– शिखर तक पहुँचने के लिए ताकत चाहिए होती है, चाहे वो माउन्ट एवरेस्ट का शिखर हो या कोई दूसरा लक्ष्य।
– इंसान को कठिनाइयों की आवश्यकता होती है, क्योंकि सफलता का आनंद उठाने कि लिए ये ज़रूरी हैं।
– हम सभी के पास एक समान प्रतिभा नहीं होती, लेकिन हम सभी के पास अपनी प्रतिभा को विकसित करने समान अवसर होते हैं।
– किसी भी धर्म में किसी धर्म को बनाए रखने और बढाने के लिए दूसरों को मारना नहीं बताया गया।
– मैं हमेशा इस बात को स्वीकार करने के लिए तैयार था कि मैं कुछ चीजें नहीं बदल सकता।
– अगर किसी देश को भ्रष्टाचार – मुक्त और सुन्दर-मन वाले लोगों का देश बनाना है तो, मेरा दृढ़तापूर्वक मानना है कि समाज के तीन प्रमुख सदस्य ये कर सकते हैं- पिता, माता और गुरु।
– इससे पहले कि सपने सच हों आपको सपने देखने होंगे।
– अगर आप सूर्य की तरह चमकना चाहते हो, तो पहले सूर्य की तरह जलना सीखो।
– महान सपने देखने वालों के महान सपने हमेशा पूरे होते हैं।
– यदि हम स्वतंत्र नहीं हैं तो कोई भी हमारा आदर नहीं करेगा।
– अपने मिशन में कामयाब होने के लिए, आपको अपने लक्ष्य के प्रति एकचित्त निष्ठावान होना पड़ेगा।
– हमें आज कुछ बलिदान करना होगा ताकि हमारे बच्चों का कल बेहतर हो सके।
– ऊपर आकाश की तरफ देखिये, हम अकेले नहीं हैं – सारा ब्रह्माण्ड हमारे साथ है।सपने देखने वालों और मेहनत करने वालों के सपने पूरे करने में समस्त ब्रह्माण्ड उनकी मदद करता है।
– एक अच्छी पुस्तक हज़ार दोस्तों के बराबर होती है जबकि एक अच्छा दोस्त एक पुस्तकालय के बराबर होता है।
– जीवन में कठिनाइयाँ हमे बर्बाद करने नहीं आती, बल्कि यह हमारी छुपी हुई सामर्थ्य और शक्तियों को बाहर निकलने में हमारी मदद करती हैं। कठिनाइयों को यह जान लेने दो की आप उससे भी ज्यादा कठिन हो।
– आत्मविश्वास और कड़ी मेहनत, असफलता नामक बिमारी को मारने के लिए सबसे बढ़िया दवाई है। ये आपको एक सफल व्यक्ति बनाती है।
– देश का सबसे अच्छा दिमाग, क्लास रूम की आखरी बेंचो पर मिल सकता है।
– आप अपना भविष्य नहीं बदल सकते पर आप अपनी आदते बदल सकते है और निश्चित रूप से आपकी आदते आपका भविष्य बदल देगी।
– भगवान ने हमारे मष्तिष्क और व्यक्तित्व में  असीमित शक्तियां और क्षमताएं दी हैं। ईश्वर की प्रार्थना हमें इन शक्तियों को विकसित करने में मदद करती है।
– आर्थिक स्थिति ने मुझे शाकाहारी बनने के लिए मजबूर किया लेकिन बाद में, मैं इसे पसंद करने लगा।
– मेरा सन्देश विशेष रूप से युवाओं को हैं – वे अलग तरह से सोचने का साहस रखें, कुछ नया करने (अविष्कार) करने का साहस रखें, अनजाने रास्तों पर चलने का साहस रखें, असंभव को खोजने का साहस रखें, समस्याओं पर जीत हासिल करने का साहस रखें। ये महान गुण हैं जिन पर युवाओं को जरूर कार्य करना चाहिए।
– इन चार सिद्धांतों का पालन करने कुछ भी हासिल किया जा सकता है –
1. महान लक्ष्य बनाना
2. ज्ञान अर्जित करना
3. कड़ी मेहनत करना
4. दृढ रहना।
– सपने वो नहीं जो हम सोते हुए देखते हैं, बल्कि वो हैं जो हमें सोने नहीं देते।
डॉक्टर कलाम ने अपना जीवन सम्पूर्ण भारत को समर्पित किया है, और उन्होंने एक शक्तिशाली और समृद्ध भारत का स्वप्न देखा था। अब हमारी भी जिम्मेदारी बनती है कि हम भी उस स्वप्न को पूर्ण करने में योगदान दें। यही सच्ची श्रद्धांजलि होगी कलाम साहब के लिए।।

About the author

Nisha Shekhawat Adhikari

B.sc.(math)
MBA( HR & marketing)
She has participated in various functions as a speaker.
Content or blog writer by passion. She had written few blogs in DNA newspaper Jaipur and Some articles for college magazines.

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