Devotion

कूष्मांडा हैं माँ का चौथा रूप!

नवरात्र-पूजन के चौथे दिन कूष्माण्डा देवी के स्वरूप की उपासना की जाती है। अपनी मंद, हल्की हँसी द्वारा अंड अर्थात ब्रह्मांड को उत्पन्न करने के कारण इन्हें कूष्माण्डा देवी के रूप में पूजा जाता है। संस्कृत भाषा में कूष्माण्डा को कुम्हड़ कहते हैं। बलियों में कुम्हड़े की बलि इन्हें सर्वाधिक प्रिय है। इस कारण से भी माँ कूष्माण्डा कहलाती हैं। यहाँ बताना चाहूंगी कि कोई भी देवी या देवता किसी भी तरह की जीव हत्या या बली नहीं चाहते। उन्हें बली यानी बलिदान चाहिए है लेकिन किसी जीव का नहीं बल्कि हमारे अंदर उपस्थित बुराइयों का। हम इंसान इतने स्वार्थी निकले कि खुद की बुराईयों की बली देना मुश्किल लगा तो बेचारे बेजुबान जीवों को मारने लगे और इतना घिनोना कृत्य देवी के लिए किया है, ये कह कर उन्हें बार बार अपमानित किया है। आप खुद सोचें कि जिन देवी की 9 दिन आराधना करते समय हम लहसुन प्याज तक नहीं खाते, उन्हीं देवी की इच्छा किसी जीव की हत्या करनी होगी? ऐसे लोगों से और विद्वानों से थोड़ी दूरी बनाए रखें जो ऐसे असंगत तर्क देते हैं। चलिये आगे बढ़ते हैं और माँ के इस रूप की और चर्चा करते हैं।

जब सृष्टि का अस्तित्व नहीं था, तब इन्हीं देवी ने ब्रह्मांड की रचना की थी। अतः ये ही सृष्टि की आदि-स्वरूपा, आदिशक्ति हैं। इनका निवास सूर्यमंडल के भीतर के लोक में है। वहाँ निवास कर सकने की क्षमता और शक्ति केवल इन्हीं में है। इनके शरीर की कांति और प्रभा भी सूर्य के समान ही हैं। माँ की आठ भुजाएँ हैं। अतः ये अष्टभुजा देवी के नाम से भी विख्यात हैं।

माँ कूष्माण्डा की उपासना से भक्तों के समस्त रोग-शोक मिट जाते हैं। इनकी भक्ति से आयु, यश, बल और आरोग्य की वृद्धि होती है। माँ कूष्माण्डा अत्यल्प सेवा और भक्ति से प्रसन्न होने वाली हैं। यदि मनुष्य सच्चे हृदय से इनका शरणागत बन जाए तो फिर उसे अत्यन्त सुगमता से परम पद की प्राप्ति हो सकती है।

नारी शक्ति ही वो ताकत है जो सूर्य से अधिक तेज, चंद्रमा से अधिक शीतलता रखती है। नारी शक्ति का सम्मान जिसने भी किया है वह जीवन में ऊंचाइयों को प्राप्त हुआ है, चाहे वो परमहंस हो या स्वामी विवेकानंद। नारी ही वो शक्ति है जो माँ के हर रूप को जीवंत करती है। नारी ही वो देवी है जो खुद घाव लेकर अपने बच्चों को मखमल के सेज पर सुलाती है। इसीलिए तो देवी को माँ कहते हैं। क्योंकि माँ जैसा इस ब्रह्मांड में दूजा कोई और नही है।

About the author

Nisha Shekhawat Adhikari

B.sc.(math)
MBA( HR & marketing)
She has participated in various functions as a speaker.
Content or blog writer by passion. She had written few blogs in DNA newspaper Jaipur and Some articles for college magazines.

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